Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra लद्दाख के जाने-माने शिक्षाविद, इंजीनियर और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। 28 जून 2026 से शुरू हुए उनके अनिश्चितकालीन अनशन ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है, क्योंकि लगातार भूखे रहने की वजह से उनकी सेहत तेजी से बिगड़ती जा रही है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर यह पूरा मामला क्या है, वांगचुक की सेहत को लेकर अब तक क्या जानकारी सामने आई है और इस मुद्दे पर देशभर में क्या प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
सोनम वांगचुक वही शख्सियत हैं जिनसे प्रेरित होकर आमिर खान की फिल्म ‘3 इडियट्स’ में फुनसुक वांगड़ू का किरदार गढ़ा गया था। शिक्षा सुधार के क्षेत्र में उनके काम को देश-विदेश में सराहा जाता रहा है। Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
अनशन की शुरुआत क्यों हुई? Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
सोनम वांगचुक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नामक संगठन के साथ मिलकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। इस आंदोलन की मुख्य मांग है — NEET-UG परीक्षा में हुई कथित पेपर लीक गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। छात्रों और अभिभावकों में परीक्षा प्रणाली को लेकर लंबे समय से नाराजगी थी, और इसी असंतोष ने इस बड़े आंदोलन का रूप ले लिया।
स्वास्थ्य में लगातार गिरावट Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
अनशन के 18 दिन पूरे होने के साथ ही सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। CJP संस्थापक अभिजीत डिप्के लगातार उनकी सेहत से जुड़े अपडेट साझा कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक:
- वांगचुक का वजन लगभग 8 से 8.5 किलोग्राम तक घट चुका है।
- उनका ब्लड प्रेशर गिरकर करीब 104-109/66-70 mmHg तक पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी नीचे है।
- उनके ब्लड शुगर लेवल में भी बार-बार गिरावट देखी गई, जो 70 mg/dL से नीचे जा रहा है।
- लगातार चक्कर आना, मांसपेशियों का कमजोर होना और शरीर में तेज दर्द जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
- वीडियो और तस्वीरों में उनकी पसलियां तक साफ नजर आने लगी हैं, जो शरीर में पोषण की गंभीर कमी को दर्शाता है।
डिप्के के अनुसार, वांगचुक को उठने-बैठने और यहां तक कि वॉशरूम तक चलने में भी तेज चक्कर और दिक्कत महसूस हो रही है। इसके बावजूद वांगचुक ने कमजोरी के बीच भी हौसला बनाए रखा है और कहा है कि वे भले ही शरीर से कमजोर पड़ गए हों, लेकिन उनका हौसला मजबूत बना हुआ है। Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
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दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए वकील और कार्यकर्ता राकेश कुमार सैनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है। इस याचिका में सरकार से अपील की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़ने पर तरल आहार के जरिए पोषण दिया जाए, भले ही इसके लिए फोर्स-फीडिंग यानी जबरन आहार देने का सहारा क्यों न लेना पड़े। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो कुछ ही दिनों में उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है और सुनवाई को अर्जेंट लिस्ट में रखा गया है।
सरकार की चुप्पी और जनता का गुस्सा Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से बातचीत के लिए अब तक कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा गया है। इस चुप्पी को लेकर सोशल मीडिया पर भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, प्रदर्शन स्थल पर एक फूड व्लॉगर के वीडियो को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया, जिसमें कुछ वॉलंटियर्स को खाना खाते हुए दिखाया गया, जबकि वांगचुक अनशन पर हैं। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों की राय को दो हिस्सों में बांट दिया है।
समर्थन में उठ रही आवाजें Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
देश के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक चेहरे इस मुद्दे पर खुलकर सामने आए हैं। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने वांगचुक के आंदोलन को समर्थन दिया है। इसके अलावा लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, अर्थशास्त्री जयति घोष सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने भी वांगचुक से अपील की है कि वे अपनी जान की परवाह करते हुए अनशन खत्म करें, हालांकि उन्होंने आंदोलन की मांगों को लेकर अपनी एकजुटता भी जताई है।
अनशन और स्वास्थ्य: एक गंभीर चेतावनी
चिकित्सकीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो लंबे समय तक बिना भोजन के रहना शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। शुगर लेवल का लगातार गिरना, ब्लड प्रेशर में भारी कमी और मांसपेशियों का टूटना — ये सभी लक्षण दिखाते हैं कि शरीर एक गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। ऐसी परिस्थिति में तुरंत चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
निष्कर्ष Sonam Wangchuk ki tabiyat bigra
सोनम वांगचुक का यह अनशन सिर्फ एक व्यक्ति की भूख हड़ताल भर नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बन चुका है। उनकी बिगड़ती सेहत ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है, और अब सबकी निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है किसी की जान की सुरक्षा — यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का सवाल बन गया है।
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