fancykhabar.com

Saud Ki Kahani 7 साल हॉस्टल में बीता बचपन कम उम्र में शादी और लोगों की नफरत… जब सबने मुझे गलत कहा, तब मैंने SDM बनने की कसम खा ली |

7 साल हॉस्टल में बीता बचपन कम उम्र में शादी और लोगों की नफरत… जब सबने मुझे गलत कहा, तब मैंने SDM बनने की कसम खा ली | Saud Ki Kahani

Saud Ki Kahani – एक ऐसी कहानी जो शायद आपकी आंखें भी नम कर दे| हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसी कहानी होती है, जिसके बारे में दुनिया बहुत कम जानती है। लोग सिर्फ हमारी मुस्कुराहट देखते हैं, लेकिन उन आंसुओं को नहीं देखते जो हमने अकेले में बहाए होते हैं। Saud Ki Kahani भी कुछ ऐसी ही है। यह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि मेरी असली जिंदगी की कहानी है।

मेरा नाम Saud Khan है और मैं बिहार के कटिहार जिले के लभा गांव का रहने वाला हूं। आज मैं अपनी एक छोटी-सी दुकान चलाता हूं। लोग मुझे एक दुकानदार के रूप में जानते हैं, लेकिन इस दुकान तक पहुंचने और यहां तक खुद को संभालकर लाने के पीछे कई सालों का संघर्ष छिपा हुआ है।

7 साल हॉस्टल में बीता मेरा बचपन Saud Ki Kahani

जब बच्चे अपने मां-बाप के साथ खेलते हैं, उनके साथ खाना खाते हैं और हर छोटी-बड़ी खुशी उनके साथ बांटते हैं, तब मैं अपने परिवार से दूर हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था।

मैंने अपनी जिंदगी के लगभग सात साल हॉस्टल में बिताए।

हॉस्टल ने मुझे पढ़ाई तो सिखाई, लेकिन उससे भी ज्यादा जिंदगी जीना सिखाया। वहां मैंने खुद अपने कपड़े संभाले, खुद अपनी परेशानियां झेली और खुद को मजबूत बनाना सीखा।

त्योहार आते थे तो मन करता था कि मां के हाथ का खाना खाऊं, लेकिन कई बार हॉस्टल की चारदीवारी ही मेरा घर बन जाती थी। रात में मां की याद आती थी, लेकिन मैं अपने आंसू किसी को दिखाता नहीं था।

उसी समय मैंने एक सपना देखा था कि एक दिन मैं ऐसा इंसान बनूंगा जिस पर मेरे मां-बाप गर्व करेंगे।

कम उम्र में शादी और बदलती हुई जिंदगी Saud Ki Kahani

  7 साल हॉस्टल में बीता बचपन कम उम्र में शादी और लोगों की नफरत… जब सबने मुझे गलत कहा, तब मैंने SDM बनने की कसम खा ली | Saud Ki Kahani
7 साल हॉस्टल में बीता बचपन कम उम्र में शादी और लोगों की नफरत… जब सबने मुझे गलत कहा, तब मैंने SDM बनने की कसम खा ली | Saud Ki Kahani

साल 2023 मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बनकर आया। मैंने अपनी पसंद की लड़की से शादी कर ली। उस समय मेरी उम्र कम थी। बहुत लोगों ने कहा कि मैंने जल्दबाजी कर दी है। कुछ लोगों ने मेरा मजाक उड़ाया, कुछ ने कहा कि अब मेरी जिंदगी खत्म हो गई।

लेकिन जिंदगी किसी की बातों से नहीं चलती।

शादी के बाद जिम्मेदारियां अचानक बहुत बढ़ गईं। जहां दूसरे लड़के अपने भविष्य की योजना बना रहे थे, वहीं मुझे परिवार की जिम्मेदारियां भी निभानी थीं।

घर का माहौल भी धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता गया। कई ऐसी परिस्थितियां आईं जिन्हें संभालना आसान नहीं था। गांव के लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। बिना पूरी सच्चाई जाने कई लोगों ने मुझे और मेरी पत्नी को गलत समझा। उन दिनों ऐसा लगता था कि जैसे पूरी दुनिया हमारे खिलाफ हो गई है।

कुछ रिश्ते भी समय के साथ दूर हो गए। ऐसे शब्द सुनने पड़े जो शायद किसी बेटे को कभी नहीं सुनने चाहिए। उन बातों ने मुझे अंदर तक तोड़ दिया।

जब लगा कि जिंदगी रुक जाएगी Saud Ki Kahani

मेरी जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया जब घर की परेशानियां इतनी बढ़ गईं कि सब कुछ बिखरता हुआ नजर आने लगा। परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा था। मैं हर दिन खुद को मजबूत दिखाता था, लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट चुका था।

कई रातें ऐसी थीं जब मैं चुपचाप बैठकर सिर्फ सोचता रहता था कि आखिर मेरी जिंदगी में इतना सब क्यों हो रहा है।

लेकिन हर बार मुझे अपने मां-बाप का चेहरा याद आता था।

मैं मुसलमान हूं और मेरा ईमान मुझे यही सिखाता है कि जिंदगी अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है। उसी विश्वास ने मुझे संभाला। मैंने खुद से एक वादा किया—

“अब मैं हार नहीं मानूंगा। एक दिन ऐसा मुकाम हासिल करूंगा कि मेरे मां-बाप का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा।”

यही वादा मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत बन गया।

सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक दुकान… और फिर भी पढ़ाई

आज मैं रोज सुबह 6 बजे दुकान खोलता हूं और रात लगभग 9 बजे तक काम करता हूं।

कई लोगों को लगता है कि दुकान चलाना आसान होता है, लेकिन जो इंसान रोज 15 घंटे मेहनत करता है, वही उसकी थकान समझ सकता है।

मेरी दुकान ही मेरी रोजी-रोटी है और वही मेरी पढ़ाई की जगह भी है।

जब दुकान पर ग्राहक नहीं होते, तब मैं अपनी किताबें निकाल लेता हूं। कभी भारतीय संविधान पढ़ता हूं, कभी इतिहास, कभी सामान्य ज्ञान और कभी प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी से जुड़ी किताबें।

ग्राहक आता है तो किताब बंद कर देता हूं। ग्राहक चला जाता है तो फिर वहीं से पढ़ाई शुरू कर देता हूं।

बहुत लोग मेरी दुकान देखते हैं, लेकिन उस काउंटर पर रखी किताबों को नहीं देखते।

आज अल्लाह के करम से मेरा कारोबार लगभग 10 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, लेकिन मेरे लिए पैसा मंजिल नहीं है। यह सिर्फ एक साधन है।

मेरा सबसे बड़ा सपना – SDM बनना

अगर कोई मुझसे पूछे कि मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना क्या है, तो मेरा जवाब सिर्फ एक होगा—

SDM बनना।

मैं सिर्फ एक सरकारी नौकरी नहीं चाहता।

मैं चाहता हूं कि जिस दिन मैं SDM बनूं, उस दिन सबसे पहले अपने मां-बाप के सामने खड़ा होकर कहूं—

“आज आपकी दुआओं ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।”

मैं चाहता हूं कि लोग मेरे अब्बू से कहें—

“मुबारक हो, आपका बेटा SDM बन गया।”

शायद वही दिन मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन होगा।

Saud Ki Kahani से मैं युवाओं से क्या कहना चाहता हूं

अगर आप यह Saud Ki Kahani पढ़ रहे हैं और आपको लगता है कि आपकी जिंदगी मुश्किलों से भरी हुई है, तो मेरी एक बात हमेशा याद रखिए—

मुश्किलें हमेशा रहेंगी, लेकिन आपका फैसला तय करेगा कि आप हारेंगे या जीतेंगे।

लोग आपको गलत समझेंगे।

लोग आपका मजाक उड़ाएंगे।

लोग आपकी गलतियां याद रखेंगे।

लेकिन अगर आप मेहनत नहीं छोड़ेंगे, तो एक दिन वही लोग आपकी सफलता की कहानी भी सुनाएंगे।

Read more click here

आखिर में… Saud Ki Kahani

आज मैं खुद को सफल इंसान नहीं मानता, क्योंकि मेरी मंजिल अभी बाकी है।

मैं आज भी हर सुबह दुकान खोलता हूं।

आज भी हर दिन मेहनत करता हूं।

आज भी हर खाली समय में किताब खोलकर पढ़ता हूं।

और आज भी हर रात सोने से पहले अपने उस सपने को याद करता हूं, जिसने मुझे टूटने नहीं दिया।

मैं Saud Khan हूं।

मैं टूटा जरूर हूं, लेकिन बिखरा नहीं।

मैं थका जरूर हूं, लेकिन रुका नहीं।

और मुझे पूरा यकीन है कि जिस दिन मैं SDM बनूंगा, उस दिन मेरी सबसे बड़ी जीत मेरी नौकरी नहीं होगी…

बल्कि मेरे मां-बाप की आंखों में दिखाई देने वाला गर्व होगा।

यही है Saud Ki Kahani… और यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। Saud Ki Kahani

more info

Exit mobile version