Donald Trump ka Mount Rushmore अमेरिका ने 4 जुलाई 2026 को अपनी आज़ादी के 250 साल (Semiquincentennial) पूरे होने का जश्न मनाया। इस ऐतिहासिक मौके की शुरुआत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जुलाई की रात साउथ डकोटा के माउंट रशमोर नेशनल मेमोरियल से एक भाषण देकर की। लेकिन जिस भाषण से देश को एकजुट करने की उम्मीद थी, वह अपनी तीखी राजनीतिक भाषा की वजह से सुर्खियों में आ गया।
भाषण की शुरुआत जोश से, अंत विवाद से
ट्रंप ने जॉर्ज वॉशिंगटन, थॉमस जेफरसन, अब्राहम लिंकन और थियोडोर रूजवेल्ट की विशाल मूर्तियों के सामने खड़े होकर भाषण शुरू किया तो उसमें अमेरिकी असाधारणता (American exceptionalism) का जोशीला जिक्र था। लेकिन भाषण जैसे-जैसे आगे बढ़ा, इसका रुख पूरी तरह बदल गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भाषण अतीत के राष्ट्रपतियों द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए आमतौर पर गैर-राजनीतिक और एकजुट करने वाले भाषणों से बिल्कुल अलग था। पारंपरिक रूप से इस मौके पर दिए जाने वाले भाषण राष्ट्र को जोड़ने पर केंद्रित होते हैं, लेकिन इस बार मामला अलग रहा।
कम्युनिज्म को बताया “सबसे बड़ा खतरा” Donald Trump ka Mount Rushmore
भाषण के आखिरी हिस्से में ट्रंप ने अमेरिका में तथाकथित “कम्युनिस्ट खतरे” के फिर से उभरने की बात कही। उन्होंने इसे अमेरिकी स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा बताते हुए इसकी तुलना 9/11 और दोनों विश्व युद्धों से भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कुछ नई ताकतें, जिनमें कुछ नए आप्रवासी भी शामिल हैं, ऐसी विचारधाराओं को बढ़ावा दे रही हैं जो अमेरिकी जीवनशैली के पूरी तरह खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अमेरिका की विरासत को लेकर आलोचनात्मक बातें फैलाते हैं या यह कहते हैं कि देश “चोरी की गई ज़मीन” पर बना है, वे इतिहास को बदनाम करने से भी बड़ा काम कर रहे हैं।
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आगे आने वाले मिडटर्म चुनावों पर टिप्पणी
ट्रंप ने इस मौके का इस्तेमाल नवंबर 2026 में होने वाले मिडटर्म चुनावों पर बात करने के लिए भी किया। उन्होंने रिपब्लिकन समर्थकों से आग्रह किया कि वे सीनेट फ़िलिबस्टर को खत्म करने और SAVE America Act नाम के चुनावी विधेयक को पास कराने में मदद करें, वरना पार्टी को मिडटर्म चुनावों में नुकसान झेलना पड़ सकता है।
भाषण देने से पहले खराब मौसम की चुनौती

कार्यक्रम से ठीक पहले साउथ डकोटा में तेज़ बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिसकी वजह से अधिकारियों को दो बार “शेल्टर-इन-प्लेस” की चेतावनी जारी करनी पड़ी और प्री-शो कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। इसके बावजूद ट्रंप रात करीब 11 बजे (ET) मंच पर पहुंचे और भाषण दिया। Donald Trump ka Mount Rushmore
Mount Rushmore पर अपना चेहरा जोड़ने की चर्चा फिर उठी
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप माउंट रशमोर पहुंचे हों। उनके समर्थक लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि उनकी तस्वीर भी इन चार राष्ट्रपतियों के साथ पहाड़ पर उकेरी जाए, हालांकि नेशनल पार्क सर्विस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि तकनीकी रूप से यह संभव नहीं है। इसके बावजूद यह चर्चा एक बार फिर सोशल मीडिया पर ज़ोर पकड़ गई।
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दूसरी तरफ की प्रतिक्रियाएं
ट्रंप के भाषण के उलट, न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी, जो डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं, ने भी 250वीं वर्षगांठ पर अपना संबोधन दिया। उन्होंने सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके भाषण के कई हिस्से राष्ट्रपति की विभाजनकारी बयानबाजी की ओर इशारा करते नजर आए। उन्होंने अमेरिका के संस्थापक आदर्शों को किसी भी सत्तावादी व्यवस्था से ज्यादा मजबूत बताया। इसके अलावा, पहले अमेरिकी पोप बने पोप लियो XIV ने भी वेटिकन से एक वर्चुअल संदेश में अमेरिका से मानवीय गरिमा, स्वतंत्रता और एकता के संस्थापक सिद्धांतों की ओर लौटने की अपील की।
जनता की राय बंटी हुई
अप्रैल में हुए एक AP-NORC सर्वे के अनुसार, करीब 40% अमेरिकी वयस्क इस 250वीं वर्षगांठ को लेकर “गर्व” महसूस करते हैं, जबकि करीब 30% ने खुद को “उत्साहित” बताया। आम नागरिकों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं — कुछ लोगों ने त्योहार को राजनीति से अलग रखकर सिर्फ जश्न मनाने की बात कही, तो कुछ ने खुले तौर पर मौजूदा राजनीतिक ध्रुवीकरण पर चिंता जताई। Donald Trump ka Mount Rushmore
भीषण गर्मी ने भी डाला असर
समारोह के दौरान अमेरिका के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का असर भी देखने को मिला। इस वजह से फिलाडेल्फिया में परेड रद्द करनी पड़ी, और वॉशिंगटन डीसी में नेशनल मॉल पर लगे “ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर” को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।Donald Trump ka Mount Rushmore
निष्कर्ष
अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ, जो आमतौर पर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानी जाती, इस बार गहरे राजनीतिक ध्रुवीकरण की तस्वीर भी दिखा गई। एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप का माउंट रशमोर से दिया गया तीखा राजनीतिक भाषण था, तो दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं और धार्मिक हस्तियों की एकता और सहिष्णुता की अपीलें। यह घटनाक्रम साफ दिखाता है कि आज का अमेरिका जश्न और सियासी बंटवारे के बीच झूल रहा है।
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